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मंजिल पाना है

मंजिल पाना है सही रास्ते पर निरंतर चलने की आदत बना लीजिए जैसे-जैसे आगे बढ़ेंगे मंजिल धीरे धीरे करीब आएगी


अपनी मुकद्दर ऐसी है दर-दर ठोकरें खा रहा हूं उनका साथ मिलने के बाद भी प्यार पाने को तिल तिल तरस रहा हूं


हम शराफत दिखाने की कोशिश करते रहे वह बेरहमी से पेश आकर भी जिसे जान से ज्यादा चाहने लगा था एक झटके में उसको उड़ा ले गया


वह कब बदल देंगे अपना इरादा इसका कोई ठिकाना नहीं थोड़ा सोच समझ कर चलना तुम इश्क समझ बैठोगे वह अपना समय पास करने के लिए सिर्फ मस्तियां कर रहे होंगे

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फासले खुद-ब-खुद कम हो जाएंगे इश्क का सिलसिला जारी रखना लोग उधार देकर टूट जाते हैं अपने वादों पर समय से कायम रहना वह सच्चा दोस्त होता है जो दुख की घड़ी में साथ देता है जेब में पैसे होने पर दोस्त हजार मिल जाते हैं झूठी कहानी बनाकर इस तरह बदनाम किया है कि सर उठाना भी मुश्किल हो गया है लोग गली-गली फब्तियां करते हैं पहचान छुपाना मुश्किल हो गया है जबसे उन्होंने इशारों में प्यार करने की इजाजत दिया मैं बेचैन रहने लगा हूं

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